कमजोर कानून और लचर व्यवस्था की नाव पर सवार होकर सेक्स टॉयज अब window ( Online Shopping) से ही सही, लोगों की जिंदगी में घुस रहे हैं। जी हां, विंडो यानी ऑनलाइन बाजार।

तभी तो तमाम प्रतिबंध के बावजूद ,सेक्स टॉएज की बिक्री का सालाना मार्केट यहां 1200 से 1300 करोड़ रुपये का हो गया है। इन खिलौनों से जुड़े तमाम पहलुओं को जानने की कोशिश की

तभी तो तमाम प्रतिबंध के बावजूद ,सेक्स टॉएज की बिक्री का सालाना मार्केट यहां 1200 से 1300 करोड़ रुपये का हो गया है। इन खिलौनों से जुड़े तमाम पहलुओं को जानने की कोशिश की
दोस्तों आज में अपने ब्लॉग में बता रहा हूँ। की भारतीय बाज़ार में सेक्स खिलौने बेचना अपराध है या नहीं।
कामसूत्र के इस देश में सेक्स विवाद का विषय है, जिस पर खुलकर बात करने से भी लोग परहेज करते हैं। यहां कॉन्डम फैमिली प्लानिंग का एक टूल है, लेकिन वाइब्रेटर वाला कॉन्डम सेक्स टॉयज की कैटिगरी में आ जाता है। वही सेक्स टॉयज, जो भारतीय कानूनों के तहत गैरकानूनी माने जाते हैं, लेकिन हालिया इंटरनेट ट्रेंड्स को देखें तो ये टॉयज अब आसानी से ऑनलाइन शॉपिंग के जरिए चुपके-चुपके हमारी जद में पहुंच चुके हैं। इसके लिए कमजोर कानूनों का हवाला दें या फिर इंटरनेट की दुनिया में मॉनिटरिंग की कमी का, सेक्स और इससे जुड़े प्रॉडक्ट्स को ओपन मार्केट में खरीदने के बजाय ऑनलाइन हासिल करना ज्यादा मुफीद हो चला है।टॉयज या कॉस्मेटिक प्रॉडक्ट्स
अभी तक सेक्स से जुड़े प्रॉडक्ट्स मसलन जेल, कैप्सूल्स, स्प्रे वगैरह केमिस्ट की शॉप पर ही उपलब्ध होते थे, लेकिन हाल-फिलहाल में कई ऑनलाइन वेबसाइट्स मशहूर हो चली हैं, जो इन प्रॉडक्ट्स के अलावा कुछ 'खास' आइटम्स भी बेच रही हैं। इन साइट्स पर लॉन्जरी और नॉर्मल सेक्स प्रॉडक्ट्स के साथ कुछ बैटरी ऑपरेटेड डिवाइस, वाइब्रेटर्स और लेटेक्स डॉल बेची जा रही हैं, जो करीब-करीब या पूरी तरह से सेक्स टॉयज की श्रेणी में ही आते हैं। चूंकि सेक्स टॉयज की कोई सर्वमान्य परिभाषा नहीं गढ़ी गई है, इसलिए ऑनलाइन रिटेलर इन्हें कॉस्मेटिक प्रॉडक्ट्स या हेल्थ प्रॉडक्ट्स बताकर बेच रहे हैं। इन साइट्स पर दर्ज हेल्पलाइन नंबरों पर जब इन प्रॉडक्ट्स के लीगल स्टेटस की जानकारी मांगी गई तो बताया गया कि ये सेक्स टॉयज नहीं, बल्कि हेल्थ या कॉस्मेटिक प्रॉडक्ट्स हैं।
कमजोर कानून और लचर व्यवस्था की नाव पर सवार होकर सेक्स टॉयज अब विंडो से ही सही, लोगों की जिंदगी में घुस रहे हैं। जी हां, विंडो यानी online Shopping website
कमजोर कानून और लचर व्यवस्था की नाव पर सवार होकर सेक्स टॉयज अब विंडो से ही सही, लोगों की जिंदगी में घुस रहे हैं। जी हां, विंडो यानी online Shopping website
कौन-कौन से प्रॉडक्ट्स
मस्टरबेटर, वाइब्रेटर, लेटेक्स डॉल्स, इनहैंसर, एडिबल अंडरगारमेंट्स, पेनिस बलून्स जैसी चीजें इन साइट्स पर खुलेआम बेची जा रही हैं। इनमें एक वेबसाइट ऐसी भी है, जो खुद को भारत के पहले अडल्ट सेक्स स्टोर के तौर पर प्रचारित कर रही है। भारत में मशहूर एक विदेशी पॉर्नस्टार को इस साइट का ब्रैंड अम्बैस्डर बनाया गया है। खास बात यह है
क्या कहते हैं बेचने वाले
एक आकलन के मुताबिक, भारत में गैरकानूनी ढंग से सेक्स टॉएज की बिक्री का सालाना मार्केट 1200 से 1300 करोड़ रुपये का है। उधर, सेक्स प्रॉडक्ट्स बेचने वाली इन साइट्स को ऑपरेट करने वालों काे इस तरह के प्रॉडक्ट्स बेचने में कुछ गलत नजर नहीं आता। उनका कहना है कि अगर हमें यह पता चलेगा कि हमारा कोई भी प्रॉडक्ट भारतीय कानून के तहत गैरकानूनी है या िकसी प्रॉक्डक्ट को बेचकर हम भारतीय कानून का उल्लंघन कर रहे हैं तो हम उसे नहीं बेचेंगे। हालांकि, वे यह भी कहते हैं कि जब तक हमें लगता है कि हमारा प्रॉडक्ट अश्लीलता नहीं फैला रहा या उसे इस तरह से प्रोजेक्ट नहीं किया गया है कि वह अश्लील लगे, तब तक इन्हें बेचने में कोई हर्ज नहीं है।
Source:- NTB Delhi 02-03-2014
क्या है भारत में कानून
देश में सेक्स टॉयज की ब्रिकी आईपीसी के सेक्शन 292 (1) के तहत गैरकानूनी है। पहली बार कसूर साबित होने पर 2 साल की सजा, जबकि इसके बाद दोषी ठहराए जाने पर 5 साल तक की सजा का प्रावधान है। बावजूद इसके दिल्ली में पालिका बाजार और मुंबई में क्राफोर्ड मार्केट इन सेक्स टॉयज की गैरकानूनी बिक्री के लिए बदनाम हैं और पुलिस यहां गाहे-बगाहे कार्रवाई भी करती रहती है। जहां तक इन सेक्स टॉयज को लेकर विवाद का सवाल है, 2007 में एक बड़े भारतीय Condom निर्माता ने वाइब्रेटर रिंग वाला कॉन्डम लॉन्च किया था। उस वक्त आलोचकों ने इसे सेक्स टॉएज की कैटिगरी में रखा था। बाद में मध्य प्रदेश सरकार ने इसकी बिक्री पर बैन लगा दिया था। एडवोकेट विराग गुप्ता कहते हैं कि अश्लीलता को कानूनी तौर पर परिभाषित करान बेहद मुश्किल है। इस मुद्दे पर कानून साफ न होने की वजह से आखिरकार बात किसी प्रॉडक्ट के इस्तेमाल के पहलू पर आकर टिक जाती है। विराग के मुताबिक, अगर किसी ने यह साबित कर दिया कि उसके वाइब्रेटर खरीदने का मकसद लस्सी बनाना है, तो कानून चाहकर भी उसका कुछ नहीं बिगाड़ सकता।
गलत नहीं मानते डॉक्टर
कानूनी तौर पर जो भी स्थिति हो, पर डॉक्टर्स इनके इस्तेमाल को जायज और सेहत के लिए फायदेमंद मानते हैं। मशहूर सेक्सॉलॉजिस्ट डॉ. प्रकाश कोठारी कहते हैं कि किसी अनजान शख्स के साथ सुकून पाने के मुकाबले इनका इस्तेमाल बेहतर है। एक ऐसी उम्र भी होती है, जब कामेच्छा कंट्रोल के बाहर हो जाती है। ऐसे में इंफेक्शन और अनचाहे गर्भ का रिस्क लेने के बजाय वैकल्पिक तरीके से सुकून पाना बेहतर है। कई लोग सेक्स के दौरान ऑर्गेजम तक नहीं पहुंच पाते। उनके लिए भी ये टॉयज फायदेमंद हैं। ऐसी चीजों का इस्तेमाल दुनिया भर में होता है। जहां तक नैतिकता की बात है तो इनका इस्तेमाल किसी भी तरीके से गलत नहीं है। अनैतिक तो यह है कि सेक्स की जरूरत होने पर रेगुलर पार्टनर के इतर किसी से असुरक्षित संबंध बनाए जाएं।
ऑनलाइन बाजार पर नजर जरूरी
देश में ई-कॉमर्स बिजनेस का बाजार 2013 तक करीब 80 हजार करोड़ रुपये का था, जो 2020 तक पांच गुना
तक बढ़ जाने की उम्मीद है। भारत में ऑनलाइन शॉपिंग बेहद पॉपुलर हो चली है, इसलिए इस सेक्टर पर निगरानी की जरूरत भी है। हाल-फिलहाल की खबरों पर ध्यान दें तो ड्रग्स, हथियार, प्रतिबंधित जानवर सब कुछ ऑनलाइन पर धड़ल्ले से बेचा जा रहा है।
साइबर एक्सपर्ट आसिम मिर्ज़ा कहते हैं कि ऑनलाइन होने वाली गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए देश में कानून बेहद कमजोर हैं। ऑनलाइन मार्केटिंग को रेगुलेट करने के लिए कोई अलग से कानून नहीं है। आईटी एक्ट है भी तो यह उपभोक्ता के अधिकारों के संरक्षण की बात नहीं करता। ऐसे में एक बेहतर और मजबूत फ्रेमवर्क की जरूरत है, जो ऑनलाइन बाजार पर निगरानी करे और उसे रेगुलेट करने में सक्षम हो।
तक बढ़ जाने की उम्मीद है। भारत में ऑनलाइन शॉपिंग बेहद पॉपुलर हो चली है, इसलिए इस सेक्टर पर निगरानी की जरूरत भी है। हाल-फिलहाल की खबरों पर ध्यान दें तो ड्रग्स, हथियार, प्रतिबंधित जानवर सब कुछ ऑनलाइन पर धड़ल्ले से बेचा जा रहा है।
साइबर एक्सपर्ट आसिम मिर्ज़ा कहते हैं कि ऑनलाइन होने वाली गैरकानूनी गतिविधियों को रोकने के लिए देश में कानून बेहद कमजोर हैं। ऑनलाइन मार्केटिंग को रेगुलेट करने के लिए कोई अलग से कानून नहीं है। आईटी एक्ट है भी तो यह उपभोक्ता के अधिकारों के संरक्षण की बात नहीं करता। ऐसे में एक बेहतर और मजबूत फ्रेमवर्क की जरूरत है, जो ऑनलाइन बाजार पर निगरानी करे और उसे रेगुलेट करने में सक्षम हो।
मस्टरबेटर, वाइब्रेटर, लेटेक्स डॉल्स, इनहैंसर, एडिबल अंडरगारमेंट्स, पेनिस बलून्स जैसी चीजें इन साइट्स पर खुलेआम बेची जा रही हैं। इनमें एक वेबसाइट ऐसी भी है, जो खुद को भारत के पहले अडल्ट सेक्स स्टोर के तौर पर प्रचारित कर रही है। भारत में मशहूर एक विदेशी पॉर्नस्टार को इस साइट का ब्रैंड अम्बैस्डर बनाया गया है। खास बात यह है
कि इस तरह की साइट्स पर कस्टमर की प्राइवेसी को बनाए रखने के लिए कई जतन किए जा रहे हैं। ये कंपनियां बेहद सीक्रेट या डिस्क्रीट पैकिंग में इन प्रॉडक्ट्स को आपके घर तक पहुंचाने को तैयार हैं। इनमें से कुछ प्रॉडक्ट्स इंटरनैशनल हैं, जिनसे जुड़ी सभी कस्टम ड्यूटी और टैक्स चुकाने के बाद इंटरनैशनल कुरियर के जरिए इन्हें घर भेजा रहा है। इसके अलावा, घर पर इन्हें रिसीव करने में दिक्कत हो तो कस्टमर इन्हें बुक करने के बाद बताए गए पिकअप पॉइंट से भी हासिल कर सकते हैं।
कि इस तरह की साइट्स पर कस्टमर की प्राइवेसी को बनाए रखने के लिए कई जतन किए जा रहे हैं। ये कंपनियां बेहद सीक्रेट या डिस्क्रीट पैकिंग में इन प्रॉडक्ट्स को आपके घर तक पहुंचाने को तैयार हैं। इनमें से कुछ प्रॉडक्ट्स इंटरनैशनल हैं, जिनसे जुड़ी सभी कस्टम ड्यूटी और टैक्स चुकाने के बाद इंटरनैशनल कुरियर के जरिए इन्हें घर भेजा रहा है। इसके अलावा, घर पर इन्हें रिसीव करने में दिक्कत हो तो कस्टमर इन्हें बुक करने के बाद बताए गए पिकअप पॉइंट से भी हासिल कर सकते हैं।
Source:- NTB Delhi 02-03-2014
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